BREAKING
Global summit addresses climate change with new commitments Tech giant announces breakthrough in quantum computing Stock markets reach all-time high amid economic recovery
Menu

भारतीय चुनावों में EVM और VVPAT कैसे काम करते हैं? पूरी और आसान गाइड

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और यहाँ चुनाव कराना किसी विशाल आयोजन से कम नहीं। लाखों मतदान केंद्र, करोड़ों वोटर्स और हजारों उम्मीदवार— ऐसे माहौल में पारदर्शिता और सुरक्षा बहुत ज़रूरी है। पहले के समय में बैलेट पेपर से वोटिंग होती थी, लेक

October 5, 2025 · 👁 36 views
भारतीय चुनावों में EVM और VVPAT कैसे काम करते हैं? पूरी और आसान गाइड

EVM क्या है?

EVM यानी Electronic Voting Machine एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिसमें वोटर सिर्फ एक बटन दबाकर अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देता है।
इस मशीन में दो मुख्य यूनिट होती हैं—

  1. Control Unit (CU)
  2. Ballot Unit (BU)

इन दोनों यूनिट्स को एक केबल से जोड़ा जाता है और फिर उस पर सील लगाई जाती है।

♦ Ballot Unit — जहाँ वोटर बटन दबाता है
♦ Control Unit — जहाँ वोट स्टोर होते हैं और चुनाव अधिकारी मशीन संचालित करता है

भारत में उपयोग होने वाली EVM मशीनें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और ECIL द्वारा बनाई जाती हैं।

EVM के मुख्य फीचर्स

  • इंटरनेट से जुड़ी नहीं होती
    • ब्लूटूथ, वाईफाई, सिम— कोई नेटवर्क नहीं
    • बैटरी ऑपरेटेड (बिजली कट भी हो जाए तो वोटिंग जारी रहे)
    • एक मशीन में 3840 वोट तक स्टोर करने की क्षमता
    • हर उम्मीदवार को एक अलग बटन
    • ओवरवोटिंग या डुप्लीकेट वोटिंग असंभव
    • टैंपर-प्रूफ डिज़ाइन

इसी कारण इसे दुनिया की सबसे सुरक्षित वोटिंग मशीनों में से एक माना जाता है।

EVM कैसे काम करती है?

पूरी प्रक्रिया नीचे आसान शब्दों में समझिए—

1. मतदाता की पहचान

पहले वोटर की पहचान की जाती है—
• EPIC (Voter ID)
• या मान्य पहचान पत्र
• वोटर लिस्ट से मिलान

2. अधिकारी Control Unit से वोटिंग सक्षम करता है

मतदान अधिकारी Control Unit पर “Ballot” बटन दबाता है।
जैसे ही Ballot active होता है—

→ Ballot Unit का लाल LED जल जाता है
→ वोटर बटन दबा सकता है

3. वोटर Ballot Unit पर अपना वोट देता है

वोटर अपने पसंदीदा उम्मीदवार के सामने लगे बटन को दबाता है।

→ एक बीप की आवाज़ आती है
→ EVM इस वोट को स्थायी रूप से रिकॉर्ड कर लेती है

4. VVPAT पर्ची दिखाती है (7 सेकंड)

अब EVM से जुड़ी VVPAT मशीन 7 सेकंड के लिए एक पर्ची दिखाती है जिसमें—

  • उम्मीदवार का नाम
    • पार्टी का चुनाव चिन्ह

दिखाई देता है।

5. पर्ची से वोटर को पुष्टि मिलती है

वोटर देख लेता है कि उसका वोट सही व्यक्ति को गया।

6. पर्ची मशीन के अंदर गिर जाती है

यह पर्ची वोटर को नहीं मिलती।
यह VVPAT बॉक्स में सुरक्षित रखी जाती है ताकि जरूरत पड़ने पर इनकी गिनती की जा सके।

VVPAT क्या है? क्यों ज़रूरी है?

VVPAT का पूरा नाम है—

Voter Verifiable Paper Audit Trail

यह एक मशीन है जो वोटर को यह समझाने के लिए लगाई जाती है कि उसका वोट सही तरीके से दर्ज हुआ है।

VVPAT का मुख्य उद्देश्य—
♦ चुनाव में पारदर्शिता
♦ जनता का भरोसा बढ़ाना
♦ वोटिंग प्रक्रिया की पुष्टि

जब वोटर बटन दबाता है, तो उसी उम्मीदवार की पर्ची मशीन स्क्रीन पर दिखाई जाती है।

VVPAT कैसे काम करती है? चरणों में समझें

1. वोट डाला

जैसे ही वोटर EVM पर बटन दबाता है—

→ EVM यह जानकारी VVPAT को भेजती है

2. पर्ची प्रिंट होती है

VVPAT पर्ची में दिखता है—
• उम्मीदवार का नाम
• प्रतीक (Symbol)
• मतदाता के वोट की पुष्टि

3. 7 सेकंड का डिस्प्ले

पर्ची एक पारदर्शी शीशे में 7 सेकंड दिखती है।

4. पर्ची सेफ बॉक्स में गिरती है

वोटर को यह पर्ची नहीं दी जाती ताकि वोट बिकने, वोट दबाव या गलत उपयोग की संभावना न रहे।

5. जरूरत पड़ने पर काउंटिंग

अगर किसी बूथ पर असामान्यता की शिकायत हो, तब VVPAT की पर्चियों की गिनती की जाती है।

EVM और VVPAT एक साथ कैसे काम करते हैं?

दोनों मशीनें एक केबल से जुड़ी होती हैं।
वोटिंग की प्रक्रिया इस क्रम में चलती है—

  1. Control Unit वोटिंग सक्रिय करता है
  2. वोटर Ballot Unit पर बटन दबाता है
  3. EVM वोट रिकॉर्ड करती है
  4. VVPAT पर्ची दिखाती है
  5. पर्ची बॉक्स में जमा होती है

दोनों सिस्टम पूरी तरह से ऑफलाइन हैं।
कोई इंटरनेट, वाईफाई, नेटवर्क नहीं।
इसलिए हैकिंग की संभावना व्यावहारिक रूप से शून्य है।

क्या EVM को हैक किया जा सकता है?

अधिकांश विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और चुनाव आयोग यही मानते हैं कि—

♦ EVM हैक करना व्यवहारिक रूप से असंभव है
♦ यह स्वतंत्र, स्टैंडअलोन मशीन है
♦ कोई operating system नहीं
♦ कोई wireless system नहीं
♦ बाहरी सिग्नल रिसीव नहीं कर सकती

साथ ही, भारत में चुनाव आयोग कई स्तरों पर सुरक्षा अपनाता है—

  • Strong room में CCTV
    • राजनीतिक दलों के प्रत्याशी सील की निगरानी करते हैं
    • हर चरण पर mock polling
    • सील तोड़ने का सिर्फ एक तरीका— मशीन खोलना
    • मशीन खोलते ही वह तुरंत dead हो जाती है

इसलिए EVM को विश्वसनीय माना जाता है।

VVPAT की पर्चियों की गिनती कैसे होती है?

भारत में काउंटिंग इस प्रकार होती है—

  1. सभी EVM काउंट की जाती हैं
  2. कुछ रैंडम बूथ VVPAT के लिए चुने जाते हैं
  3. इन VVPAT बॉक्स को खोलकर पर्चियाँ गिनी जाती हैं
  4. इन परिणामों को EVM के परिणामों से मिलाया जाता है

अब तक हर चुनाव में—
VVPAT और EVM का डेटा 100% एक जैसा पाया गया है।

EVM + VVPAT चुनाव प्रक्रिया को कैसे बेहतर बनाते हैं?

♦ वोटिंग तेज़
♦ गिनती तेज़
♦ नकली वोटिंग रोकना आसान
♦ पारदर्शिता बढ़ी
♦ भ्रष्टाचार कम
♦ पर्ची देखकर वोटर को विश्वास मिलता है

भारत जैसे बड़े देश के लिए यह तकनीक बहुत उपयोगी है।

निष्कर्ष

भारत की चुनाव प्रणाली दुनिया की सबसे मजबूत और सुरक्षित प्रणालियों में मानी जाती है।
EVM और VVPAT ने—

  • तेजी
    • पारदर्शिता
    • सुरक्षा
    • विश्वास

चारों क्षेत्रों में चुनावों की गुणवत्ता को बढ़ाया है।

वोटर को यह पूरा अधिकार है कि वह वोट दे और VVPAT स्क्रीन पर अपनी पसंद के उम्मीदवार की पर्ची देखकर आश्वस्त हो सके।
इन तकनीकों के चलते भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और अधिक मजबूत हुई है।

Share this article: