1. भारतीय संघीय व्यवस्था की मूल परिभाषा
भारत की संघीय व्यवस्था का अर्थ है —
केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का संविधान के अनुसार विभाजन।
यह प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि:
- देश मजबूत और एकजुट रहे
• राज्यों को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिले
• राष्ट्रीय विषयों पर केंद्र को अधिकार मिले
• स्थानीय मुद्दों पर राज्य अपने स्तर पर काम कर सकें
संविधान के अनुच्छेद 1 के अनुसार —
“भारत राज्यों का संघ होगा।”
यह लाइन स्पष्ट करती है कि भारत एक ऐसी संघीय संरचना है जिसमें केंद्र सबसे मजबूत इकाई है।
2. भारत की संघीय व्यवस्था की विशेषताएँ
भारत को हमेशा “Quasi-Federal” — यानी "अर्ध-संघीय" कहा जाता है, क्योंकि इसमें federal और unitary दोनों गुण हैं।
नीचे इसकी प्रमुख विशेषताएँ दी गई हैं:
2.1 लिखित और सर्वोच्च संविधान
- भारत का संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है।
• यह केंद्र और राज्यों की शक्तियों को स्पष्ट रूप से विभाजित करता है।
• संविधान सर्वोच्च कानून है, जिसे सभी सरकारों को मानना पड़ता है।
2.2 दोहरी सरकार
भारत में दो स्तर की सरकारें हैं:
- केंद्र सरकार – राष्ट्रीय स्तर के मामले
- राज्य सरकारें – राज्य के स्थानीय मामले
इसके अलावा स्थानीय स्तर पर पंचायत और नगर निकाय भी काम करते हैं, जिसे “तीसरा स्तर” कहा जाता है।
2.3 शक्तियों का तीन सूचियों में बंटवारा
अनुच्छेद 246 के अनुसार अनुसूची 7 में तीन सूची दी गई हैं:
- संघ सूची (Union List)
• रक्षा
• विदेश नीति
• रेलवे
• मुद्रा
इन पर केवल केंद्र कानून बना सकता है। - राज्य सूची (State List)
• पुलिस
• कृषि
• स्वास्थ्य
• स्थानीय प्रशासन
इन पर केवल राज्य कानून बना सकते हैं। - समवर्ती सूची (Concurrent List)
• शिक्षा
• विवाह
• वन
• श्रम कानून
इन पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, लेकिन विवाद की स्थिति में केंद्र का कानून मान्य होता है।
2.4 स्वतंत्र न्यायपालिका
- सुप्रीम कोर्ट केंद्र और राज्यों के बीच विवादों का अंतिम समाधान करता है।
• न्यायपालिका संविधान की रक्षा करती है।
• यह शक्तियों के दुरुपयोग को रोकती है।
2.5 वित्तीय संघवाद
केंद्र और राज्य दोनों कर वसूलते हैं।
राजस्व बंटवारा वित्त आयोग (Finance Commission) निर्धारित करता है।
2.6 आपातकालीन प्रावधान
यह भारत को अन्य संघीय देशों से अलग बनाता है।
आपातकाल में केंद्र के पास अत्यधिक अधिकार होते हैं, जिससे भारत “unitary tilt” वाला देश माना जाता है।
3. केंद्र और राज्यों के बीच संबंध
भारत की संघीय व्यवस्था चार बड़े प्रकार के संबंधों पर आधारित है:
3.1 प्रशासनिक संबंध
- केंद्र राज्यों को दिशा दे सकता है।
• केंद्र सरकार राज्यों को महत्वपूर्ण नीतियों के लिए सलाह दे सकती है।
• राज्यपाल, राष्ट्रपति के नाम पर शपथ लेते हैं।
3.2 विधायी संबंध
- केंद्र और राज्य अपनी-अपनी सूची के विषयों पर कानून बनाते हैं।
• राष्ट्रीय हित में राज्य सूची के विषय पर भी केंद्र कानून बना सकता है (अनुच्छेद 249)।
3.3 वित्तीय संबंध
- करों का बंटवारा संविधान द्वारा तय होता है।
• वित्त आयोग राजस्व वितरण की सिफारिश करता है।
• केंद्र राज्यों को अनुदान (grants) देता है।
3.4 आपातकालीन संबंध
तीन तरह के आपातकाल:
- राष्ट्रीय आपातकाल
- राज्य आपातकाल (President’s Rule)
- वित्तीय आपातकाल
इन स्थितियों में केंद्र की शक्तियाँ बढ़ जाती हैं।
4. संघीय विवाद समाधान तंत्र
भारत में संघीय विवाद कई माध्यमों से हल किए जाते हैं:
- सुप्रीम कोर्ट (अनुच्छेद 131)
• अंतर-राज्य परिषद
• वित्त आयोग
• योजना आयोग (अब नीति आयोग)
5. भारत का संघीय मॉडल दूसरे देशों से कैसे अलग है?
भारत का मॉडल:
- अमेरिका की तरह संघीय भी है
• रूस और फ्रांस की तरह एकात्मक भी
• इसमें linguistic, social, cultural विविधता को समायोजित किया गया है
• आपातकाल में केंद्र सर्वोच्च शक्ति रख सकता है
• राज्यों को स्वतंत्रता है, लेकिन अंतिम अधिकार संविधान के पास है
इसीलिए इसे “Cooperative Federalism” और “Competitive Federalism” दोनों कहा जाता है।
6. भारतीय संघीय व्यवस्था का महत्व
- राज्यों की विविधता को मान्यता मिलती है
• शासन अधिक प्रभावी बनता है
• स्थानीय समस्याओं का स्थानीय समाधान मिलता है
• आर्थिक असमानता कम करने में मदद मिलती है
• राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है
• लोकतांत्रिक मूल्यों की सुरक्षा होती है
7. संघीय व्यवस्था की चुनौतियाँ
- केंद्र-राज्य विवाद
• धन का असमान वितरण
• राज्यों द्वारा विशेष दर्जा मांगना
• सीमा विवाद
• भाषा और सांस्कृतिक विविधता
• राजनीतिक मतभेदों के कारण टकराव
• राज्यों की आर्थिक निर्भरता
8. संघीयता मजबूत करने के लिए जरूरी कदम
- राजस्व का न्यायपूर्ण बंटवारा
• राज्यों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता
• अंतर-राज्य परिषद का सक्रिय उपयोग
• स्थानीय निकायों को मजबूत करना
• संवैधानिक सुधार
• सहकारी संघवाद को बढ़ाना
निष्कर्ष
भारतीय संघीय व्यवस्था दुनिया की सबसे अनोखी और संतुलित प्रणालियों में से एक है।
यह एक ऐसा मॉडल है जहाँ केंद्र मजबूत है, लेकिन राज्यों को भी पर्याप्त शक्तियाँ दी गई हैं। इसने भारत जैसे विशाल, विविध और जटिल देश को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भारत की संघीय संरचना समय के साथ और भी विकसित हो रही है —
अब Cooperative Federalism से Competitive Federalism की ओर बढ़ते हुए।