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भारत में मतदान प्रक्रिया कैसे होती है? — पूरा विस्तार

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और यहाँ की मतदान प्रक्रिया विश्‍वभर में एक मजबूत और व्यवस्थित मॉडल मानी जाती है। चुनाव आयोग का उद्देश्य हर नागरिक को निष्पक्ष, सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से वोट डालने का अधिकार देना है। मतदान प्रक्रिया केवल वोट ड

October 13, 2025 · 👁 72 views
भारत में मतदान प्रक्रिया कैसे होती है? — पूरा विस्तार

1. चुनाव आयोग की भूमिका

● चुनाव आयोग स्वतंत्र संस्था है जो पूरी प्रक्रिया का प्रबंधन करता है।
● आयोग चुनाव की तिथि, चरणों और नियमों का निर्धारण करता है।
● आयोग किसी भी तरह के राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रहता है।
◆ चुनावों को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण बनाने की जिम्मेदारी आयोग की होती है।
◆ आयोग सभी राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों को निर्देश देता है।
➤ आयोग EVM, VVPAT, सुरक्षा मानक और कर्मचारी तैनाती की व्यवस्था करता है।
➤ आचार संहिता लागू करना भी चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।

2. कौन वोट डाल सकता है?

▪︎ भारत का हर नागरिक जिसका नाम मतदाता सूची में है और जिसकी आयु 18 वर्ष या अधिक है, वह मतदान कर सकता है।
▪︎ मतदाता का भारत का नागरिक होना अनिवार्य है।
◆ मतदाता को उस क्षेत्र का निवासी होना चाहिए जहाँ वह वोट डालना चाहता है।
▸ मतदान हेतु किसी भी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता जरूरी नहीं होती।
▸ कैदियों (गंभीर अपराधों में) के मतदान अधिकार सीमित होते हैं।
● NRI नागरिक भी विशेष नियमों के तहत मतदान कर सकते हैं।

3. मतदाता सूची (Voter List) तैयार होना

◆ चुनाव आयोग हर वर्ष मतदाता सूची अपडेट करता है।
◆ 18 वर्ष पूर्ण करने वाले युवाओं का पंजीकरण किया जाता है।
● मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या सुधार की प्रक्रिया खुली रहती है।
● मतदाता फॉर्म-6 भरकर नया नाम जोड़ सकता है।
➤ आयोग हर क्षेत्र में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) तैनात करता है।
➤ BLO मतदाताओं की सत्यापन प्रक्रिया पूरी करते हैं।
▪︎ अंतिम मतदाता सूची चुनाव से थोड़ा पहले जारी की जाती है।

4. मतदान केंद्रों की तैयारी

▸ मतदान केंद्र का चयन स्कूल, सरकारी भवन या सामुदायिक केंद्र में किया जाता है।
▸ हर बूथ पर पुलिस और अर्द्धसैनिक बल तैनात रहते हैं।
◆ दिव्यांग मतदाताओं हेतु रैंप और व्हीलचेयर की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
◆ पुरुष और महिला कतारें अलग-अलग लगाई जाती हैं।
➤ EVM और VVPAT की सेटिंग मतदान से एक दिन पहले ही की जाती है।
➤ मतदान अधिकारियों की टीम पहले से प्रशिक्षित की जाती है।
● मीडिया और पर्यवेक्षकों को भी बूथ पर जाने की अनुमति दी जाती है (नियमों के तहत)।

5. मतदान के दिन की प्रक्रिया

1.मतदाता की पहचान सत्यापन

● मतदाता को चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त पहचान पत्र दिखाना होता है।
● EPIC कार्ड (मतदाता पहचान पत्र) सबसे मान्य दस्तावेज़ है।
◆ यदि EPIC उपलब्ध नहीं, तो पासपोर्ट, आधार, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड आदि स्वीकार्य हैं।
➤ अधिकारी मतदाता सूची में नाम मिलान करते हैं।
➤ मतदाता के नाम पर टर्नआउट मार्क लगाया जाता है।

2. उंगली पर स्याही लगाना

▪︎ पहचान के बाद मतदाता की उंगली पर अमिट स्याही लगाई जाती है।
▪︎ स्याही लगने का उद्देश्य दोबारा मतदान को रोकना है।
◆ यह विशेष रासायनिक स्याही कई दिनों तक नहीं मिटती।

3. EVM और VVPAT से मतदान

▸ EVM पर प्रत्येक उम्मीदवार और उसकी पार्टी का नाम/चिह्न दिखता है।
▸ मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार के सामने का बटन दबाता है।
● बटन दबाते ही EVM बीप की आवाज देता है।
● इसके बाद VVPAT मशीन 7 सेकंड के लिए एक पर्ची दिखाती है।
◆ इस पर्ची में उम्मीदवार का नाम और पार्टी की जानकारी दिखती है।
◆ पर्ची स्वतः सुरक्षित बॉक्स में गिर जाती है।
➤ इससे वोट की पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।

सुरक्षा व्यवस्था

● लोकसभा या विधानसभा चुनाव के समय भारी सुरक्षा बल तैनात रहते हैं।
● संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त पुलिस बल लगाया जाता है।
◆ बूथ कैप्चरिंग रोकने के लिए पुलिस और केंद्रीय बल सतर्क रहते हैं।
➤ दूर-दराज क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त व्यवस्था की जाती है।
▪︎ मतदान केंद्र में कैमरे भी लगाए जाते हैं (नियमों के तहत)।

मतदान के बाद EVM सील करना

◆ मतदान समाप्त होते ही EVM और VVPAT सील कर दिए जाते हैं।
◆ सील की प्रक्रिया बेहद पारदर्शी होती है।
▸ चुनाव एजेंट भी इस प्रक्रिया के साक्षी होते हैं।
▸ किसी भी अनियमितता की स्थिति में रिपोर्ट दर्ज की जाती है।
● EVM सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम में ले जाई जाती है।
● स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा CCTV और केंद्रीय बल करते हैं।

मतगणना की प्रक्रिया

➤ मतगणना के दिन उम्मीदवारों के प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं।
➤ EVM का रिजल्ट बटन दबाकर प्रत्येक मशीन का डेटा निकाला जाता है।
◆ मतगणना पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के तहत होती है।
● VVPAT की पर्चियों की भी गिनती कुछ बूथों पर अनिवार्य रूप से की जाती है।
▪︎ निर्वाचन अधिकारी परिणाम की घोषणा करते हैं।

विशेष परिस्थितियों में मतदान व्यवस्था

(क) दिव्यांग मतदाता

  • व्हीलचेयर
    • रैंप
    • स्वयंसेवकों की सहायता
    • घर से मतदान की विशेष सुविधा (कुछ राज्यों में)

(ख) वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुविधा

◆ 85+ आयु या गंभीर बीमार व्यक्तियों के लिए विशेष गृह-मतदान विकल्प उपलब्ध है।
◆ बूथ पर अलग कतारें भी बनाई जाती हैं।

(ग) दूरस्थ क्षेत्रों में मतदान

● पहाड़ी, जंगल और बर्फीले इलाकों में चुनाव कर्मचारी पैदल कई किलोमीटर जाते हैं।
● हेलीकॉप्टर और नाव का उपयोग करके भी EVM पहुँचाई जाती है।
➤ यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी क्षेत्र मतदान से वंचित न रहे।

आदर्श आचार संहिता (MCC)

◉ आचार संहिता चुनाव की घोषणा के साथ ही लागू होती है।
◉ राजनीतिक दल सरकारी संसाधन का उपयोग प्रचार के लिए नहीं कर सकते।
◉ वोटरों को रिश्वत, शराब या उपहार देना प्रतिबंधित होता है।
◉ बयानबाज़ी, नफरत फैलाने वाले भाषण और हिंसा भड़काना सख्त वर्जित है।

लोकतंत्र में मतदान की भूमिका

◆ मतदान लोकतंत्र का सबसे बड़ा अधिकार है।
● हर मत भविष्य का नेतृत्व तय करता है।
● राजनीतिक स्थिरता में नागरिकों की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है।
▪︎ मतदान नागरिकों को अपनी आवाज उठाने का अधिकार देता है।
▸ एक वोट भी सरकार बदल सकता है — यह कई बार सिद्ध हुआ है।

निष्कर्ष

भारत में मतदान प्रक्रिया दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे सुव्यवस्थित लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। करोडों लोग चुनाव में शामिल होते हैं और लाखों अधिकारी इसे सुचारु रूप से संपन्न कराते हैं। पारदर्शिता, सुरक्षा और विश्वसनीयता भारतीय चुनाव प्रणाली की सबसे बड़ी ताकत है।

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