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चुनाव आयोग क्या है और कैसे काम करता है?

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और इतने विशाल देश में निष्पक्ष चुनाव करवाना किसी चुनौती से कम नहीं है। हर पाँच साल में करोड़ों मतदाता, लाखों मतदान केंद्र और हजारों अधिकारी चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा बनते हैं। इतनी बड़ी प्रक्रिया को निष्पक्ष, पार

October 17, 2025 · 👁 43 views
चुनाव आयोग क्या है और कैसे काम करता है?

1. चुनाव आयोग क्या है?

● चुनाव आयोग भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत स्थापित एक स्वतंत्र और स्वायत्त संस्था है।
● इसका दायित्व संपूर्ण देश में चुनावों का संचालन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण करना है।
◆ यह किसी सरकार के अधीन नहीं, बल्कि पूरी तरह स्वतंत्र संस्था है।
◆ न तो केंद्र सरकार और न ही किसी राज्य सरकार का चुनाव आयोग पर सीधा नियंत्रण होता है।
➤ इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को राजनीतिक दबावों से मुक्त रखना है।
➤ चुनाव आयोग न्यायपालिका की तरह निष्पक्षता के सिद्धांत पर कार्य करता है।

2. चुनाव आयोग की संरचना

भारत में चुनाव आयोग की संरचना इस प्रकार है:

(क) मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner – CEC)

● आयोग का प्रमुख अधिकारी।
● अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लेने का अधिकार इसी के पास होता है।
◆ CEC का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक (जो पहले आए)।
◆ CEC को पद से हटाना बहुत कठिन होता है, ताकि राजनीतिक दबाव न पड़े।

(ख) दो अन्य चुनाव आयुक्त (Election Commissioners)

● 1993 से चुनाव आयोग बहु-सदस्यीय संस्था बना।
● मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ 2 और आयुक्त कार्य करते हैं।
◆ सभी तीनों आयुक्तों का निर्णय बहुमत से होता है।
◆ सभी के अधिकार बराबर होते हैं।

(ग) राज्य स्तर पर मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO)

● प्रत्येक राज्य में एक CEO नियुक्त किया जाता है।
● यह राज्य चुनाव प्रक्रियाओं का संचालन करता है।

(घ) जिला और बूथ स्तर अधिकारी

➤ जिला निर्वाचन अधिकारी
➤ रिटर्निंग अधिकारी
➤ सहायक रिटर्निंग अधिकारी
➤ बूथ लेवल अधिकारी (BLO)
➤ माइक्रो ऑब्ज़र्वर

ये सभी मिलकर नीचे तक पूरी चुनाव प्रक्रिया को संचालित करते हैं।

3. चुनाव आयोग की मुख्य भूमिकाएँ

चुनाव आयोग केवल वोटिंग करवाता ही नहीं, बल्कि इससे कहीं अधिक कार्य करता है। चुनाव आयोग की कुछ महत्वपूर्ण भूमिकाएँ इस प्रकार हैं:

(1) चुनाव कार्यक्रम की घोषणा

● चुनाव कब होंगे?
● कितने चरणों में होंगे?
● किन राज्यों में किस दिन मतदान होगा?

इन सबका निर्णय आयोग करता है।

(2) मतदाता सूची (Voter List) तैयार करना

◆ हर वर्ष मतदाता सूची अपडेट होती है।
◆ 18+ आयु पूरी करने वालों को मतदाता सूची में जोड़ा जाता है।
● मृत व्यक्तियों और स्थानांतरित नागरिकों के नाम हटाए जाते हैं।
● BLO घर-घर जाकर सत्यापन करते हैं।

(3) EVM और VVPAT की व्यवस्था

➤ EVM का परीक्षण
➤ VVPAT का डेमो
➤ मशीनों की सीलिंग
➤ मशीनों की सुरक्षा

भारत में EVM को अत्यधिक सुरक्षित माना जाता है, और इसकी प्रक्रिया चुनाव आयोग ही संभालता है।

(4) आचार संहिता लागू करना (Model Code of Conduct)

चुनाव घोषित होते ही राजनीतिक दलों पर आचार संहिता लागू होती है।
इसमें शामिल प्रतिबंध:

▪︎ सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग नहीं
▪︎ धार्मिक या जातीय आधार पर भाषण नहीं
▪︎ मतदाताओं को पैसा/उपहार देकर प्रभावित नहीं
▪︎ हिंसा या नफरत फैलाने वाले शब्द नहीं
▸ सरकारी योजनाओं की नई घोषणा नहीं

आचार संहिता के उल्लंघन पर चुनाव आयोग सख्त कार्रवाई करता है।

(5) मतदान केंद्रों की तैयारी

◆ मतदान केंद्र का चयन
◆ सुरक्षा बल तैनात करना
◆ प्रकाश, पानी, रैंप जैसे सुविधाएँ सुनिश्चित करना
● मशीनों को बूथ तक पहुँचाना
● मतदान कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना

(6) मतदान प्रक्रिया की निगरानी

चुनाव आयोग यह देखता है:

● मतदान शांतिपूर्ण हो
● मशीनें सही काम करें
● मतदाता अपना अधिकार बिना डर के उपयोग कर सके
◆ किसी प्रकार की गड़बड़ी या हिंसा न हो
◆ संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात हों

(7) EVM की सीलिंग और स्ट्रॉन्ग रूम सुरक्षा

▸ मतदान के बाद EVM को सील कर स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है।
▸ उम्मीदवारों के प्रतिनिधि इस प्रक्रिया को अपनी आंखों से देख सकते हैं।
◆ स्ट्रॉन्ग रूम पर 24×7 CCTV निगरानी रहती है।
◆ सुरक्षा बल लगातार गार्ड करते हैं।

(8) मतगणना (Counting) की व्यवस्था

➤ मतगणना केंद्र स्थापित करना
➤ हर मशीन के वोट गिनना
➤ VVPAT पर्चियों का मिलान करना
➤ अंतिम परिणाम की घोषणा करना

मतगणना प्रक्रिया पारदर्शी और बहुमत आधारित होती है।

4. चुनाव आयोग के अधिकार

भारत के चुनाव आयोग के पास बहुत व्यापक अधिकार हैं, जैसे:

● किसी सरकारी अधिकारी को तुरंत हटाने का अधिकार
● राज्य सरकार से किसी भी तरह की रिपोर्ट मांगने का अधिकार
● सुरक्षा बल की तैनाती का निर्णय
◆ राजनीतिक दलों को चेतावनी या प्रतिबंध लगाने का अधिकार
◆ आचार संहिता उल्लंघन पर कार्रवाई का अधिकार
➤ किसी भी राजनीतिक सभा, विज्ञापन या प्रचार पर रोक लगाने का अधिकार

चुनाव आयोग के निर्णय को अदालत में चुनौती दी जा सकती है, लेकिन तब भी चुनाव आयोग की स्वायत्तता बनी रहती है।

5. चुनाव आयोग क्यों जरूरी है?

भारत का आकार बहुत बड़ा है और चुनाव प्रक्रिया बहुत जटिल है।
इसलिए एक स्वतंत्र आयोग जरूरी है जो:

◇ राजनीतिक दबाव से मुक्त रहें
◇ हर नागरिक को निष्पक्ष वातावरण दे सके
◇ मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करे
◇ देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था बनाए रखे
◇ परिणामों पर भरोसा कायम रखे

अगर चुनाव आयोग न हो, तो चुनावों में गड़बड़ी, हिंसा, पक्षपात और धांधली बढ़ सकती है।

6. चुनाव आयोग की चुनौतियाँ

भारत में चुनाव आयोग कई कठिन चुनौतियों के साथ काम करता है, जैसे—

● करोड़ों मतदाता
● लाखों मतदान केंद्र
◆ दूरदराज पहाड़ी और जंगल क्षेत्र
◆ सुरक्षा की चुनौतियाँ
➤ फेक न्यूज़ और सोशल मीडिया
➤ राजनीतिक दबाव
▪︎ मतदाताओं में जागरूकता की कमी

फिर भी आयोग हर चुनाव को सफल और शांतिपूर्ण बनाने में सफल रहता है।

7. डिजिटल परिवर्तन — चुनाव आयोग कैसे आधुनिक बना?

चुनाव आयोग ने कई तकनीकी बदलाव अपनाए हैं:

● EVM
● VVPAT
◆ मतदाता हेल्पलाइन 1950
◆ ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण
➤ cVIGIL ऐप – आचार संहिता उल्लंघन की रिपोर्ट
➤ Suvidha Portal – नामांकन प्रक्रिया वेबसाइट

इन प्रयासों ने प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाया है।

निष्कर्ष

भारत का चुनाव आयोग लोकतंत्र की रीढ़ है।
यह केवल चुनाव नहीं करवाता, बल्कि सुनिश्चित करता है कि:

● हर नागरिक वोट डाल सके
● राजनीतिक दल नियमों का पालन करें
◆ सुरक्षा बनी रहे
◆ मतगणना पारदर्शी रहे
◆ किसी भी तरह की धांधली रोक दी जाए

भारत में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और दक्षता ही लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।

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