1. सुप्रीम कोर्ट क्या है?
● सुप्रीम कोर्ट भारत की सबसे ऊँची अदालत है।
● इसे संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत स्थापित किया गया।
● यह भारत की पूरी न्यायपालिका का शीर्ष स्तर है।
● इसके निर्णय पूरे देश में लागू होते हैं और किसी भी अन्य अदालत को इसे मानना होता है।
◆ सुप्रीम कोर्ट को “अंतिम अपील अदालत” भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ आने के बाद कोई और अदालत नहीं बचती।
◆ यह “संविधान का रक्षक” (Guardian of Constitution) भी है।
2. सुप्रीम कोर्ट की स्थापना कब और कैसे हुई?
● भारत का सुप्रीम कोर्ट 28 जनवरी 1950 को स्थापित हुआ।
● यह ब्रिटिशकालीन “Federal Court of India” की जगह बना।
◆ पहला मुख्य न्यायाधीश थे — जस्टिस हरिलाल जे. काणिया।
◆ सुप्रीम कोर्ट की शुरुआत में यह संसद भवन के एक हिस्से में चलता था।
इसकी वर्तमान इमारत 1958 में पूरी हुई, जो आज भी भारत की न्याय व्यवस्था का प्रतीक है।
3. सुप्रीम कोर्ट की संरचना
सुप्रीम कोर्ट में कई न्यायाधीश होते हैं। संरचना इस प्रकार है:
(क) मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India – CJI)
● सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख।
● इनके पास महत्वपूर्ण प्रशासनिक और न्यायिक अधिकार होते हैं।
(ख) अन्य न्यायाधीश (Judges)
◆ भारत में सुप्रीम कोर्ट में अधिकतम 34 न्यायाधीशों की अनुमति है (1 CJI + 33 Judges).
◆ सभी न्यायाधीश मिलकर विभिन्न बेंच बनाते हैं।
(ग) बेंच के प्रकार
● सिंगल बेंच – एक न्यायाधीश
● डिवीजन बेंच – दो न्यायाधीश
● फुल बेंच – तीन या अधिक
● संविधान पीठ – पाँच या उससे अधिक न्यायाधीश
संविधान पीठ बहुत गंभीर या संवैधानिक सवालों पर निर्णय देती है।
4. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य अधिकार और भूमिकाएँ
भारत के सुप्रीम कोर्ट के पास विश्व के अधिकांश देशों की तुलना में बेहद व्यापक शक्तियाँ हैं। यहाँ इसके प्रमुख अधिकार दिए गए हैं:
(1) मूल अधिकारों की रक्षा करना
◆ जब भी सरकार या कोई संस्था नागरिकों के मूल अधिकारों का उल्लंघन करे, सुप्रीम कोर्ट में सीधे याचिका दायर की जा सकती है।
➤ इसके लिए रिट याचिका (Writ Petition) का उपयोग होता है।
सुप्रीम कोर्ट पाँच प्रकार की रिट जारी कर सकता है:
● हैबियस कॉर्पस
● मेंडमस
● सर्टिओरारी
● प्रोहीबिशन
● क्वो वारेंटो
(2) न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review)
◆ यह सुप्रीम कोर्ट की सबसे बड़ी शक्ति है।
◆ संसद या राज्य सरकार द्वारा बनाए गए किसी भी कानून को कोर्ट जाँच सकता है।
यदि कानून संविधान के विरुद्ध पाया जाता है, तो सुप्रीम कोर्ट उसे अमान्य कर सकता है।
(3) सर्वोच्च अपील अदालत
यह पूरे देश की अदालतों का अंतिम अपीलीय मंच है।
● हाई कोर्ट से असहमति होने पर अंतिम अपील यहाँ की जाती है।
● आपराधिक, दीवानी, संवैधानिक—सभी मामलों की सुनवाई हो सकती है।
(4) सलाहकारी अधिकार (Advisory Jurisdiction)
● राष्ट्रपति किसी भी महत्वपूर्ण कानून या संवैधानिक प्रश्न पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह मांग सकते हैं।
◆ यह अधिकार अनुच्छेद 143 में दिया गया है।
(5) अंतर-राज्य विवादों का समाधान
भारत जैसे विशाल देश में राज्यों के बीच विवाद सामान्य हैं, जैसे—
◆ नदी जल विवाद
◆ सीमाओं को लेकर विवाद
◆ राज्य–केंद्र विवाद
ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अंतिम माना जाता है।
(6) चुनाव संबंधी विवाद
● भारत के चुनाव आयोग, सांसदों या विधायकों के चुनाव से जुड़े विवाद सुप्रीम कोर्ट तय करता है।
(7) जनहित याचिका (PIL)
भारत में PIL ने न्याय प्रणाली को जनता के द्वार तक पहुँचाया।
● कोई भी नागरिक जनहित का मुद्दा उठाते हुए याचिका दायर कर सकता है।
● इससे गरीब, कमजोर और वंचित वर्ग को न्याय मिला।
PIL सुप्रीम कोर्ट की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जाती है।
5. सुप्रीम कोर्ट कैसे काम करता है?
यह जानना भी जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट की दैनिक कार्यप्रणाली कैसी है।
(1) केस का पंजीकरण
● याचिकाएँ ऑनलाइन या ऑफलाइन जमा होती हैं।
● रजिस्ट्री जांच करती है कि डॉक्यूमेंट पूरे हैं या नहीं।
(2) केस का आवंटन
◆ CJI केस को अलग-अलग बेंचों को सौंपते हैं।
◆ विशेष मामलों को संविधान पीठ के पास भेजा जाता है।
(3) सुनवाई और बहस
● दोनों पक्ष अपने तर्क प्रस्तुत करते हैं।
● न्यायाधीश कानूनी धाराएँ, मामलों के उदाहरण और साक्ष्य सुनते हैं।
(4) आदेश और फैसला
● बहस पूरी होने पर अदालत निर्णय सुनाती है।
● बड़े मामलों में लिखित विस्तृत आदेश जारी किया जाता है।
(5) समीक्षा याचिका
यदि किसी पक्ष को लगता है कि निर्णय में त्रुटि है, तो वह समीक्षा याचिका दायर कर सकता है।
6. सुप्रीम कोर्ट का महत्व — क्यों यह जरूरी है?
भारत में सुप्रीम कोर्ट केवल न्याय देने वाली संस्था नहीं है, बल्कि यह देश के लोकतंत्र का प्रहरी है। इसका महत्व कई रूपों में सामने आता है:
(1) संविधान का रक्षक
◆ सुप्रीम कोर्ट सुनिश्चित करता है कि
● न संसद संविधान से ऊपर है
● न कार्यपालिका कानून से ऊपर है
● न कोई नेता लोकतंत्र से ऊपर है
(2) नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने कई ऐतिहासिक फैसले दिए जिनसे नागरिकों को स्वतंत्रता और अधिकार मिले:
● निजता का अधिकार (Right to Privacy)
● LGBTQ+ अधिकार
● पर्यावरण सुरक्षा
● अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
(3) सत्ता संतुलन
देश में तीन प्रमुख संस्थाएँ हैं:
● विधायिका
● कार्यपालिका
● न्यायपालिका
सुप्रीम कोर्ट इन तीनों में संतुलन बनाए रखता है ताकि कोई भी संस्था मनमानी न कर सके।
(4) भ्रष्टाचार और दुरुपयोग पर रोक
● बड़े नेताओं
● नौकरशाहों
● कॉरपोरेट घोटालों
● सरकारी दुरुपयोग
हर मामले में सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है।
(5) सामाजिक न्याय
सुप्रीम कोर्ट ने समाज में कमजोर वर्गों को विशेष सुरक्षा दी है:
◆ अनुसूचित जाति
◆ अनुसूचित जनजाति
◆ महिलाएँ
◆ दिव्यांग
◆ पर्यावरण प्रभावित समुदाय
7. सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले (संक्षेप में)
● केशवानंद भारती केस – संविधान की "मूल संरचना" सिद्धांत
● शाहबानो केस – मुस्लिम महिलाओं के अधिकार
● निजता का अधिकार – मूल अधिकार घोषित
● अयोध्या विवाद – ऐतिहासिक एकमत निर्णय
● ट्रिपल तलाक – संवैधानिक समीक्षा
● 377 धारा – LGBTQ+ समुदाय को अधिकार
इन फैसलों से सुप्रीम कोर्ट के महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है।
8. सुप्रीम कोर्ट की चुनौतियाँ
◆ लंबित मामलों की संख्या बहुत अधिक
◆ नए मुद्दों पर कानून की कमी
◆ राजनीतिक दबाव
◆ मीडिया ट्रायल
◆ समाज में बढ़ती अपेक्षाएँ
फिर भी सुप्रीम कोर्ट लगातार अपने काम को मजबूती से निभा रहा है।
निष्कर्ष
भारत का सुप्रीम कोर्ट देश के लोकतंत्र, संविधान और नागरिकों के अधिकारों का सर्वोच्च रक्षक है। यह सरकार, संसद और राज्यों पर नज़र रखता है और सुनिश्चित करता है कि हर निर्णय संविधान के अनुरूप हो। सुप्रीम कोर्ट न केवल कानून का अंतिम व्याख्याकार है, बल्कि यह समाज में न्याय, स्वतंत्रता और समानता के मूल्यों को भी मजबूत करता है।
भारत का लोकतंत्र इसलिए मजबूत है क्योंकि उसकी रीढ़ — सुप्रीम कोर्ट — मजबूत है।