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भारत के राष्ट्रपति की शक्तियाँ और कर्तव्य क्या हैं? — आसान भाषा में विस्तृत गाइड

भारत के राष्ट्रपति की शक्तियाँ और कर्तव्य क्या हैं? — आसान भाषा में विस्तृत गाइड

October 19, 2025 · 👁 76 views
भारत के राष्ट्रपति की शक्तियाँ और कर्तव्य क्या हैं? — आसान भाषा में विस्तृत गाइड

1. राष्ट्रपति का पद क्या है?

  • भारत का राष्ट्रपति देश का पहला नागरिक (First Citizen) माना जाता है।
    • वह राज्य का प्रमुख (Head of State) होता है, जबकि प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख (Head of Government)।
    • राष्ट्रपति भारत की एकता और अखंडता का प्रतीक होता है।
    • राष्ट्रपति को देश की विधायी, कार्यपालिका, न्यायपालिका, सैन्य और आपातकालीन शक्तियाँ संविधान द्वारा प्राप्त हैं।

2. राष्ट्रपति कैसे चुना जाता है?

◆ राष्ट्रपति का चुनाव प्रत्यक्ष वोट से नहीं होता।
◆ उन्हें निर्वाचक मंडल (Electoral College) चुनता है, जिसमें शामिल होते हैं:
• लोकसभा और राज्यसभा के चुने हुए सदस्य
• सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (दिल्ली, पुदुचेरी) की विधानसभाओं के चुने हुए सदस्य
◆ चुनाव अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट के आधार पर होता है।
◆ राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।
◆ वे पुनः चुनाव लड़ सकते हैं (अनलिमिटेड बार)।

3. राष्ट्रपति की शक्तियाँ

भारत के राष्ट्रपति को कई प्रकार की शक्तियाँ दी गई हैं। इन्हें इस प्रकार समझा जा सकता है:

(A) कार्यपालिका शक्तियाँ (Executive Powers)

→ राष्ट्रपति संविधान के अनुसार भारतीय कार्यपालिका का सर्वोच्च प्रमुख है।
→ इन शक्तियों में शामिल हैं:

  • प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।
    • मंत्रिपरिषद का गठन प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति करते हैं।
    • राज्यपालों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति करते हैं।
    • सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एवं अन्य जजों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं।
    • CAG, UPSC चेयरमैन, चीफ इलेक्शन कमिश्नर, चीफ विजिलेंस कमिश्नर आदि उच्च पदों पर नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा होती है।
    • भारत के मुख्य संस्थानों जैसे CBI, NHRC आदि में महत्वपूर्ण नियुक्तियाँ राष्ट्रपति की स्वीकृति से होती हैं।

(B) विधायी शक्तियाँ (Legislative Powers)

→ राष्ट्रपति संसद का एक अभिन्न अंग है।

  • संसद का सत्र बुलाना और स्थगित करना राष्ट्रपति का अधिकार है।
  • लोकसभा को भंग करने का अधिकार भी राष्ट्रपति के पास है (प्रधानमंत्री की सलाह पर)।
  • राष्ट्रपति संसद को संबोधित कर सकते हैं, खासकर बजट सत्र की शुरुआत में यह अनिवार्य होता है।
  • संसद द्वारा पारित बिल तभी कानून बनता है, जब राष्ट्रपति उसकी मंजूरी देते हैं।
  • राष्ट्रपति बिल को वापस भी भेज सकते हैं (मनी बिल को छोड़कर)।
  • अध्यादेश (Ordinance) जारी करने का अधिकार राष्ट्रपति के पास होता है, जब संसद का सत्र न चल रहा हो।

(C) वित्तीय शक्तियाँ (Financial Powers)

→ राष्ट्रपति वित्तीय मामलों में भी प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

◆ बजट (Union Budget) संसद में राष्ट्रपति की अनुमति के बाद ही पेश किया जा सकता है।
◆ सभी मनी बिल राष्ट्रपति की सिफारिश से ही लोकसभा में पेश होते हैं।
◆ राष्ट्रपति को भारत के Consolidated Fund, Contingency Fund और Public Account के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है।

(D) सैन्य शक्तियाँ (Military Powers)

  • राष्ट्रपति भारत के तीनों सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर हैं –
    → थल सेना
    → वायु सेना
    → नौसेना
  • सेना, नौसेना और वायु सेना के प्रमुखों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं।
    • युद्ध की घोषणा या शांति संधि राष्ट्रपति की अनुमति से ही होती है (कैबिनेट की सलाह पर)।

(E) न्यायिक शक्तियाँ (Judicial Powers)

◆ राष्ट्रपति को माफी देने की शक्ति होती है। वे निम्न दंडों को माफ, कम, रोक, बदल या स्थगित कर सकते हैं:
• मृत्यु दंड
• कोर्ट मार्शल के दंड
• केंद्रीय कानूनों के तहत दिए गए दंड

◆ राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति करते हैं।
◆ राष्ट्रपति जजों के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया शुरू होने पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

(F) आपातकालीन शक्तियाँ (Emergency Powers)

भारत के संविधान में तीन प्रकार के आपातकाल की व्यवस्था है:

1. राष्ट्रीय आपातकाल (Article 352)

→ युद्ध, बाहरी हमले या आंतरिक विद्रोह की स्थिति में लगाया जाता है।
→ राष्ट्रपति द्वारा घोषित आपातकाल पूरे देश को प्रभावित करता है।
→ इससे केंद्र सरकार की शक्तियाँ काफी बढ़ जाती हैं।

2. राज्य आपातकाल / राष्ट्रपति शासन (Article 356)

→ जब किसी राज्य में संविधान के अनुसार सरकार नहीं चल पाती।
→ राष्ट्रपति उस राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर देते हैं।

3. वित्तीय आपातकाल (Article 360)

→ जब देश की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो जाए।
→ यह भारत में आज तक कभी लागू नहीं हुआ।

4. राष्ट्रपति के मुख्य कर्तव्य (Duties)

  • संविधान की रक्षा और संरक्षण करना।
    • देश की एकता, अखंडता और स्थिरता बनाए रखना।
    • राष्ट्र के प्रतिनिधि के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान को मजबूत करना।
    • सरकार का सुचारू रूप से संचालन सुनिश्चित करना (प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह पर)।
    • संसद का संचालन, संबोधन और कानूनों की अंतिम मंजूरी देना।
    • महत्वपूर्ण अधिकारियों की नियुक्ति और संस्थानों के संचालन पर निगरानी रखना।

5. राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का संबंध

◆ राष्ट्रपति देश का प्रमुख है, लेकिन वह अधिकांश कार्य प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह पर करता है।
◆ राष्ट्रपति सलाह नहीं मान सकते, क्योंकि यह संविधान के खिलाफ होगा।
◆ लेकिन कुछ मामलों में राष्ट्रपति सावधानीपूर्वक विवेक का इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे:
• प्रधानमंत्री की नियुक्ति जब स्पष्ट बहुमत ना हो
• बिल को पुनर्विचार के लिए वापस भेजना
• संवैधानिक संकट की स्थिति

6. राष्ट्रपति के अधिकार सीमित क्यों हैं?

→ यह भारत की संसदीय लोकतांत्रिक प्रणाली की संरचना है।
→ वास्तविक शक्ति जनता द्वारा चुनी गई सरकार के पास रहती है।
→ इससे लोकतंत्र मजबूत रहता है और किसी एक व्यक्ति के पास अत्यधिक शक्ति नहीं पहुँचती।

7. राष्ट्रपति का प्रतीकात्मक (Symbolic) महत्व

  • राष्ट्रपति देश की एकता और संविधान का प्रतीक है।
    • विदेश यात्राओं में राष्ट्रपति भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
    • देश के गौरव, परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं।

8. निष्कर्ष — राष्ट्रपति की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत के राष्ट्रपति की भूमिका भले ही प्रत्यक्ष रूप से सरकार चलाने की न हो, लेकिन उनका पद देश की स्थिरता, लोकतंत्र, संवैधानिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

◆ राष्ट्रपति का पद —
→ न्याय,
→ संतुलन,
→ संविधान की रक्षा
→ और लोकतांत्रिक मर्यादाओं

का प्रहरी माना जाता है।

यही कारण है कि राष्ट्रपति भारत के सबसे सम्मानित पद के रूप में पहचान रखते हैं।

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