1. महंगाई (Inflation) क्या है?
महंगाई का मतलब है—समय के साथ बाजार में वस्तुओं और सेवाओं के दाम बढ़ जाना।
जब पैसे का मूल्य कम हो जाता है, और चीज़ों के दाम बढ़ जाते हैं, तो महंगाई कहा जाता है।
उदाहरण:
अगर पिछले साल 1 लीटर दूध 50 रुपये में मिलता था और आज 60 रुपये में मिल रहा है, तो यह महंगाई है।
महंगाई का सरल अर्थ
◆ महंगाई बढ़ने पर वस्तुएँ महंगी होती हैं
◆ महंगाई बढ़ने पर पैसे की क्रय शक्ति घटती है
◆ जितने पैसे में पहले ज्यादा चीज़ें मिलती थीं, अब उतनी नहीं मिलतीं
2. महंगाई क्यों होती है? — प्रमुख कारण
महंगाई के कई कारण होते हैं। आइए एक-एक कर विस्तार से समझते हैं:
2.1 मांग बढ़ना (Demand-Pull Inflation)
जब किसी चीज़ की मांग बढ़ती है लेकिन आपूर्ति उतनी नहीं बढ़ पाती, तो कीमतें बढ़ जाती हैं।
उदाहरण:
• त्योहारों में मिठाइयों की कीमतें
• शादी के सीज़न में कपड़े और गहने
• बारिश में सब्ज़ियों के दाम
जैसे ही लोग ज्यादा खरीदने लगते हैं, कीमतें बढ़ जाती हैं।
2.2 उत्पाद बनाने की लागत बढ़ना (Cost-Push Inflation)
जब उत्पादन लागत बढ़ती है तो कंपनियाँ लागत वसूलने के लिए कीमत बढ़ा देती हैं।
लागत बढ़ने के कारण—
◆ पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ना
◆ बिजली महंगी होना
◆ कच्चा माल महंगा होना
◆ मजदूरी बढ़ना
इससे बाजार में चीज़ें महंगी मिलती हैं।
2.3 आपूर्ति में कमी (Supply Shortage)
कभी-कभी वस्तुओं की कमी से भी महंगाई बढ़ जाती है।
उदाहरण:
• खराब मौसम में सब्ज़ियाँ कम मिलती हैं
• आयात कम होने पर तेल महंगा हो जाता है
• फैक्ट्रियाँ बंद होने पर सामान कम मिलता है
जब चीज़ें कम हों और खरीदार ज्यादा, तो दाम अपने आप बढ़ते हैं।
2.4 अंतरराष्ट्रीय कारण
भारत कई चीजें विदेश से खरीदता है, जैसे—
◆ कच्चा तेल
◆ दालें
◆ इलेक्ट्रॉनिक सामान
◆ खाद्य तेल
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन चीज़ों के दाम बढ़ते हैं, तो भारत में भी महंगाई बढ़ जाती है।
2.5 सरकारी कर (Taxes)
GST, आयात शुल्क, एक्साइज ड्यूटी जैसी चीज़ें भी कीमतें बढ़ाती हैं।
उदाहरण:
• पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कर का योगदान काफी बड़ा होता है
• मोबाइल फोन पर GST बढ़े तो दाम बढ़ जाते हैं
2.6 नोटों की अधिक मात्रा (Money Supply Increase)
अगर बाजार में बहुत ज्यादा पैसा आ जाता है, तो वस्तुओं की कीमत बढ़ जाती है।
क्योंकि लोग अधिक खरीदने लगते हैं।
इसका सीधा असर—
• मांग बढ़ती है
• आपूर्ति कम पड़ जाती है
• कीमतें बढ़ जाती हैं
3. महंगाई के प्रकार
महंगाई कई तरह की हो सकती है—
3.1 सामान्य महंगाई (Creeping Inflation)
◆ धीरे-धीरे बढ़ने वाली
◆ सालाना 3–5%
◆ नियंत्रित और सामान्य मानी जाती है
3.2 तेज़ महंगाई (Walking Inflation)
◆ सालाना 5–10%
◆ आम जनता को महसूस होने लगती है
3.3 बहुत तेज़ महंगाई (Galloping Inflation)
◆ कीमतें अचानक तेजी से बढ़ती हैं
◆ देश की आर्थिक स्थिति पर खतरा
3.4 हाइपर इंफ्लेशन (Hyperinflation)
◆ कीमतें 100%–200% तक बढ़ जाती हैं
◆ मुद्रा बेकार हो जाती है
◆ कुछ देशों में ऐसा हुआ है (जैसे: ज़िम्बाब्वे, वेनेज़ुएला)
4. भारत में महंगाई कैसे मापी जाती है?
भारत में महंगाई को दो सूचकांकों से मापा जाता है—
4.1 उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI)
- आम लोगों द्वारा खरीदी जाने वाली चीज़ों के दाम
• CPI ही बताता है कि जनता के लिए चीज़ें कितनी महंगी हुईं
4.2 थोक मूल्य सूचकांक (WPI)
- थोक बाजार में वस्तुओं के दाम
• उद्योगों और व्यवसायों में इस्तेमाल होता है
CPI आम आदमी के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को बेहतर दर्शाता है।
5. महंगाई का आम आदमी पर असर
महंगाई का सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और गरीब वर्ग पर पड़ता है।
आइए समझते हैं—
5.1 क्रय शक्ति घट जाती है
★ पहले 500 रुपये में जितना सामान मिलता था, अब कम मिलता है।
5.2 बचत कम हो जाती है
- घर का बजट बिगड़ जाता है
• परिवार कम खर्च करने लगता है
• सेविंग्स नहीं के बराबर रह जाती हैं
5.3 जीवन स्तर पर असर
♦ खाने-पीने की चीज़ें महंगी
♦ बच्चों की फीस
♦ किराया
♦ दवाइयाँ
♦ बिजली-पानी के बिल
सब बढ़ने लगते हैं।
5.4 नौकरी और सैलरी पर असर
सैलरी उतनी तेज़ नहीं बढ़ती जितनी महंगाई बढ़ती है।
इससे
• वित्तीय तनाव
• EMI का बोझ
• लोन चुकाने में मुश्किल
होती है।
5.5 गरीब वर्ग पर सबसे अधिक प्रभाव
♦ राशन महंगा
♦ रोजगार सीमित
♦ स्वास्थ्य खर्च अधिक
गरीब वर्ग महंगाई से बहुत प्रभावित हो जाता है।
6. महंगाई अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी भी क्यों होती है?
कुछ सीमा तक महंगाई आवश्यक मानी जाती है क्योंकि—
• अर्थव्यवस्था में गतिविधि बढ़ती है
• कंपनियाँ उत्पादन बढ़ाती हैं
• रोजगार पैदा होता है
• बाजार में धन का प्रवाह बढ़ता है
लेकिन महंगाई बहुत अधिक होने पर स्थिति खतरनाक बन जाती है।
7. सरकार महंगाई कैसे नियंत्रित करती है?
भारत में महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार और RBI कई कदम उठाते हैं—
7.1 RBI ब्याज दरें बढ़ाता है
- लोन महंगा हो जाता है
• निवेश और खर्च धीमा
• मांग कम
• महंगाई नियंत्रित
7.2 आपूर्ति बढ़ाने के उपाय
♦ आयात बढ़ाना
♦ स्टॉक मार्केट स्थिर करना
♦ आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना
7.3 अनाज और आवश्यक वस्तुओं के भंडार खोलना
सरकार अपने स्टॉक से अनाज बाजार में लाती है ताकि कीमतें कम हों।
7.4 करों में बदलाव
कभी-कभी सरकार टैक्स कम करके वस्तुओं को सस्ता करती है।
7.5 गरीबों के लिए राहत योजनाएँ
♦ राशन कार्ड
♦ फ्री या सब्सिडी वाला अनाज
♦ Ujjwala गैस सब्सिडी
♦ PM Kisan योजना
इनसे गरीब वर्ग को राहत मिलती है।
8. आम आदमी महंगाई से कैसे निपट सकता है?
कुछ व्यावहारिक तरीके—
8.1 बजट बनाकर खर्च करें
◆ जरूरी और गैर-जरूरी खर्च अलग करें
◆ खर्च को अपने नियंत्रण में रखें
8.2 निवेश शुरू करें
♦ SIP
♦ RD
♦ FD
♦ PPF
♦ Gold
निवेश महंगाई के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है।
8.3 थोक में खरीदारी करें
- किराना
• अनाज
• जरूरत की चीजें
थोक में सस्ती पड़ती हैं।
8.4 ऊर्जा बचत करें
◆ बिजली
◆ पानी
◆ गैस
इनकी बचत से खर्च कम होता है।
8.5 ऑफर्स और डिस्काउंट का लाभ लें
♦ ऑनलाइन शॉपिंग
♦ फेस्टिव ऑफर्स
♦ कैशबैक
ये पैसे बचाते हैं।
9. निष्कर्ष
महंगाई एक जटिल आर्थिक प्रक्रिया है जो देश और व्यक्ति दोनों को प्रभावित करती है।
जहाँ हल्की महंगाई आर्थिक विकास का संकेत है, वहीं तेज़ महंगाई आम आदमी के जीवन को मुश्किल बना देती है।
सरकार और RBI लगातार कदम उठाते हैं, लेकिन नागरिकों को भी समझदारी से वित्तीय प्रबंधन करना होगा।
महंगाई को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन इससे समझदारी से निपटा जा सकता है।