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भारत में बजट (Union Budget of India) — क्या है, कैसे बनता है और आम नागरिकों पर इसका क्या असर होता है?

भारत में हर साल संसद में पेश होने वाला केंद्रीय बजट (Union Budget) देश की अर्थव्यवस्था, सरकारी योजनाओं, टैक्स व्यवस्था और विकास कार्यों की दिशा तय करता है। यह सिर्फ सरकार के लिए एक वित्तीय दस्तावेज नहीं है, बल्कि करोड़ों नागरिकों की रोज़मर्रा की ज़िं

October 24, 2025 · 👁 88 views
भारत में बजट (Union Budget of India) — क्या है, कैसे बनता है और आम नागरिकों पर इसका क्या असर होता है?

भारत में बजट क्या होता है?

किसी भी देश की सरकार को अपने कार्यों को चलाने के लिए पैसा चाहिए — जैसे सड़कें बनाना, स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा, रक्षा, किसान योजनाएँ, सब्सिडी, सरकारी कर्मचारियों को वेतन आदि। इन सभी खर्चों को व्यवस्थित ढंग से करने के लिए सरकार हर साल एक दस्तावेज बनाती है, जिसे "केंद्रीय बजट" कहा जाता है।

बजट = अगले एक वित्तीय वर्ष में सरकार कितनी आय करेगी और कितना खर्च करेगी, उसका पूरा विवरण।

भारत में बजट 1 अप्रैल से 31 मार्च तक के वित्तीय वर्ष के लिए तैयार किया जाता है।

बजट क्यों जरूरी है?

  • सरकार अपनी प्राथमिकताएँ तय करती है
    • आने वाले साल में किस क्षेत्र में कितना पैसा लगेगा यह साफ होता है
    • टैक्स व्यवस्था में बदलाव किए जाते हैं
    • गरीबी, बेरोज़गारी, स्वास्थ्य और शिक्षा योजनाओं के लिए पैसे का प्रबंधन होता है
    • देश की आर्थिक दिशा तय होती है

बजट एक तरह से देश की वित्तीय रूपरेखा (Financial Roadmap) है।

भारत में बजट कैसे बनता है? (Step-by-Step आसान प्रक्रिया)

भारत का बजट तैयार करने की प्रक्रिया काफी विस्तृत और गोपनीय होती है। लगभग 6-7 महीने पहले इसकी शुरुआत हो जाती है।

नीचे पूरी प्रक्रिया सरल भाषा में:

★ चरण 1: मंत्रालयों और विभागों से माँगों की सूची तैयार करना

भारत में 50 से अधिक मंत्रालय हैं, जैसे — रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सड़क परिवहन आदि।

  • हर मंत्रालय अपने अगले साल के खर्च का अनुमान भेजता है
    • इसमें नए प्रोजेक्ट, सब्सिडी, कर्मचारियों का वेतन, योजनाओं का विस्तार शामिल होता है

ये सभी मांगें वित्त मंत्रालय को भेजी जाती हैं।

★ चरण 2: वित्त मंत्रालय द्वारा विश्लेषण

वित्त मंत्रालय के अधिकारी:

  • मंत्रालयों की जरूरतों की जांच करते हैं
    • पिछले साल के खर्च को देखते हैं
    • नया वित्तीय अनुमान तैयार करते हैं

सबसे महत्वपूर्ण भूमिका वित्त सचिव और व्यय (Expenditure) विभाग की होती है।

★ चरण 3: राजस्व (Income) का अनुमान लगाना

सरकार अपनी आय मुख्य रूप से तीन स्रोतों से करती है:

  • टैक्स (इनकम टैक्स, GST, कस्टम ड्यूटी आदि)
    • गैर-टैक्स राजस्व (सरकारी कंपनियों से कमाई, फीस आदि)
    • उधार (बॉन्ड, RBI आदि से)

सरकार को यह पता होना जरूरी है कि वह कितना कमा सकती है, ताकि खर्च उसी के अनुसार तय किया जाए।

★ चरण 4: बजट का पहला ड्राफ्ट बनना

वित्त मंत्रालय आने वाले साल के लिए:

  • कितनी कमाई होगी
    • कितना खर्च होगा
    • कितना निवेश होगा
    • किस क्षेत्र को कितनी राशि मिलेगी

इन सबका पहला मसौदा तैयार करता है।

★ चरण 5: प्रधानमंत्री और कैबिनेट की मंजूरी

बजट की अहम बातें प्रधानमंत्री को बताई जाती हैं।

  • PMO सुझाव देता है
    • कैबिनेट महत्वपूर्ण संशोधन करती है

इस चरण पर बजट लगभग अंतिम रूप ले लेता है।

★ चरण 6: बजट की प्रिंटिंग (पूरी तरह गोपनीय)

बजट दस्तावेज काफी गोपनीय होते हैं। इसलिए वित्त मंत्रालय में कर्मचारियों को:

  • उत्तर ब्लॉक में बंद कर दिया जाता है
    • मोबाइल, इंटरनेट, संपर्क बंद
    • प्रिंटिंग प्रेस में सभी दस्तावेज तैयार किए जाते हैं

इसे "हलवा सेरेमनी" के साथ शुरू किया जाता है।

★ चरण 7: संसद में बजट पेश करना

हर साल 1 फरवरी को वित्त मंत्री संसद में बजट पेश करते हैं।

  • पहले लोकसभा में
    • फिर राज्यसभा में चर्चा होती है

★ चरण 8: संसद से अनुमोदन और बजट लागू होना

लोकसभा द्वारा पास होने के बाद बजट 1 अप्रैल से लागू हो जाता है।

भारत के बजट के मुख्य भाग

बजट में दो महत्वपूर्ण हिस्से होते हैं:

★ 1. राजस्व बजट (Revenue Budget)

यह सरकार की नियमित आय और खर्च दिखाता है।

शामिल हैं:

  • टैक्स संग्रह
    • ब्याज
    • सरकारी फीस
    • वेतन
    • सब्सिडी

★ 2. पूंजीगत बजट (Capital Budget)

यह सरकार के विकास और संपत्ति निर्माण से जुड़ा होता है।

शामिल हैं:

  • नई सड़कें
    • पुल
    • बांध
    • रेलवे परियोजनाएँ
    • सरकारी संपत्तियों का निर्माण

बजट में कौन-कौन से बदलाव किए जा सकते हैं?

  • टैक्स स्लैब बदल सकते हैं
    • GST दरें घट/बढ़ सकती हैं
    • किसानों के लिए योजनाएँ घोषित हो सकती हैं
    • शिक्षा और स्वास्थ्य बजट बढ़ सकता है
    • व्यापारियों के नियम सरल हो सकते हैं
    • इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की घोषणा हो सकती है

आम नागरिकों पर बजट का क्या असर पड़ता है?

भारत में बजट सीधे-सीधे आम जनता के जीवन को प्रभावित करता है।

नीचे विस्तार से समझें:

★ नौकरीपेशा लोगों पर असर

  • इनकम टैक्स सस्ता या महंगा हो सकता है
    • स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ सकता है
    • EEE स्कीमें या सेविंग स्कीम बदल सकती हैं
    • PF, NPS, टैक्स स्लैब में राहत

★ व्यापारियों पर असर

  • GST दरें बदल सकती हैं
    • नई कंप्लायंस में आसानी या सख्ती
    • लोन और फंडिंग की नई योजनाएँ
    • MSME सेक्टर को सहायता

★ किसानों पर असर

  • फसल बीमा
    • MSP से जुड़े निर्णय
    • उर्वरक सब्सिडी
    • नई कृषि योजनाएँ

★ छात्रों पर असर

  • शिक्षा बजट
    • छात्रवृत्ति योजनाएँ
    • स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम
    • डिजिटल शिक्षा

★ घर चलाने वाली महिलाओं पर असर

  • गैस सब्सिडी
    • महिला सुरक्षा योजनाएँ
    • महिला उद्यमियों के लिए फंडिंग
    • महंगाई पर नियंत्रण

★ आम उपभोक्ताओं पर असर

  • पेट्रोल/डीजल की कीमतें
    • इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स
    • मोबाइल फोन
    • दैनिक उपयोग की वस्तुएं

टैक्स बढ़ेगा तो कीमत बढ़ेगी, टैक्स घटेगा तो चीजें सस्ती होंगी।

भारत में बजट कब से चलता आया है? (Historical Background)

  • पहला बजट — 1860
    • स्वतंत्र भारत का पहला बजट — 1947 (आर.के. शनमुखम चेट्टी)
    • हर साल 28 फरवरी को आता था, अब 1 फरवरी को आता है
    • पेपर बजट की जगह अब डिजिटल बजट

अंतरिम बजट और पूर्ण बजट में अंतर

● अंतरिम बजट

चुनाव वाले वर्ष में आता है
सरकार सिर्फ 3–4 महीनों का खर्च बताती है

● पूर्ण बजट

पूरे साल की आर्थिक नीति और टैक्स नीति शामिल

बजट से जुड़े महत्वपूर्ण शब्द और उनके सरल मतलब

● फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit)

सरकार की आय और खर्च के बीच का फर्क

● कैपिटल एक्सपेंडिचर

नए प्रोजेक्ट्स पर खर्च

● रेवेन्यू एक्सपेंडिचर

नियमित खर्च – सब्सिडी, वेतन

● GDP

देश की कुल उत्पादन क्षमता

निष्कर्ष (Conclusion)

भारत का बजट देश की अर्थव्यवस्था का मार्गदर्शक दस्तावेज़ है। यह न केवल सरकार की कार्ययोजना बताता है, बल्कि यह भी निर्धारित करता है कि आम जनता की जेब, बाजार, रोजगार, महंगाई और विकास पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में बजट को समझना बहुत आवश्यक है, ताकि हम अपने आर्थिक निर्णय बेहतर ढंग से ले सकें।

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