◆ पर्सनल लोन क्या है?
पर्सनल लोन एक अनसिक्योर्ड लोन है, यानी इसमें आपको बैंक या NBFC को कोई गारंटी / प्रॉपर्टी / सिक्योरिटी नहीं देनी पड़ती।
➤ बैंक आपकी इनकम, क्रेडिट स्कोर, रीपेमेंट क्षमता, और जॉब स्थिरता देखकर पैसा देते हैं।
➤ लोन की राशि आम तौर पर ₹50,000 से लेकर ₹20 लाख या इससे अधिक तक हो सकती है।
➤ EMI में 1 साल से 7 साल तक में repay किया जाता है।
◆ पर्सनल लोन कैसे काम करता है?
● आप बैंक/NBFC में आवेदन करते हैं।
● बैंक आपकी KYC, नौकरी, सैलरी, बैंक स्टेटमेंट और क्रेडिट स्कोर देखकर eligibility तय करता है।
● मंजूरी मिलने पर आपके अकाउंट में पूरी राशि ट्रांसफर कर दी जाती है।
● आपको हर महीने EMI चुकानी पड़ती है, जिसमें Principal + Interest शामिल होता है।
◆ कौन लोग पर्सनल लोन ले सकते हैं?
► हर व्यक्ति eligible नहीं होता। सामान्य eligibility इस प्रकार है:
◆ आयु: 21–60 वर्ष
◆ नौकरी:
◆ Salaried कर्मचारी (Private / Govt)
◆ Self-employed professionals (CA, डॉक्टर, वकील आदि)
◆ आय:
◆ आमतौर पर न्यूनतम ₹15,000–₹25,000 मासिक
◆ क्रेडिट स्कोर:
◆ 700+ होना हमेशा फायदेमंद
◆ नौकरी स्थिरता:
◆ 6–12 महीने की minimum job stability
◆ ब्याज दरें कैसे तय होती हैं?
बैंक हर व्यक्ति को एक जैसी ब्याज दर नहीं देते। कारण:
➤ क्रेडिट स्कोर
उच्च स्कोर = कम ब्याज
खराब स्कोर = ज्यादा ब्याज
➤ इनकम
ज्यादा इनकम वालों में risk कम माना जाता है।
➤ कंपनी का रोजगार प्रकार
सरकारी नौकरी वालों को कम ब्याज मिलता है।
➤ बैंक का बेस रेट और मार्केट कंडीशन
सामान्यत: पर्सनल लोन की ब्याज दरें 10%–24% तक होती हैं।
◆ पर्सनल लोन की EMI कैसे बनती है?
EMI = Loan Amount + Interest (टुकड़ों में बाँटा हुआ)
इस पर असर डालने वाले कारक:
● Loan amount
● Loan tenure
● Rate of interest
Tenure बढ़ाने से EMI कम होती है, लेकिन total interest बढ़ जाता है।
◆ पर्सनल लोन लेने के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट्स
► पहचान:
◆ Aadhaar
◆ PAN
► पता:
◆ बिजली बिल / किराया एग्रीमेंट / पासपोर्ट
► आय के दस्तावेज:
◆ Salary slip
◆ Bank statement (3–6 महीने)
► नौकरी का प्रूफ:
◆ Appointment letter / ID card
◆ पर्सनल लोन की प्रोसेस – स्टेप-बाय-स्टेप
● Step 1: अपने जरूरत और Repayment क्षमता को समझें
● Step 2: विभिन्न बैंकों की ब्याज दरें Compare करें
● Step 3: Online/Offline आवेदन करें
● Step 4: डॉक्यूमेंट verification
● Step 5: Loan approval & Agreement signing
● Step 6: राशि अकाउंट में ट्रांसफर
● Step 7: EMI भुगतान शुरू
◆ पर्सनल लोन के फायदे
◆ कोई सिक्योरिटी नहीं चाहिए
◆ तेजी से अप्रूवल (कई जगह instant loan)
◆ कहीं भी खर्च करने की आज़ादी
◆ कम paperwork
◆ EMI में repayment आसान
◆ पर्सनल लोन के नुकसान और जोखिम
➤ ब्याज दरें अन्य लोन की तुलना में ज्यादा
➤ EMI लेट होने पर penalty + CIBIL खराब
➤ बार-बार लोन लेने से debt trap का खतरा
➤ अगर इनकम कम हो जाए तो EMI भारी पड़ सकती है
◆ पर्सनल लोन लेते समय किन बातों का ध्यान रखें?
● अपनी EMI को monthly income के 30–40% से अधिक न बढ़ने दें
● एक समय में बहुत सारे लोन न लें
● हर बैंक की hidden charges जरूर पढ़ें
● loan insurance का फायदा तभी लें जब जरूरत हो
● Prepayment charges देखकर ही लोन चुनें
● repayment के लिए Auto-debit लगाएं ताकि EMI मिस न हो
◆ पर्सनल लोन का ब्याज कम कैसे करें?
◆ क्रेडिट स्कोर सुधारें
◆ Salary account वाले बैंक से लोन लें
◆ कम duration का loan चुनें
◆ पहले existing loan बंद करें
◆ फेस्टिव offers पर apply करें
◆ क्या पर्सनल लोन लेना सही है?
अगर आपकी जरूरत genuine है और आपने repayment की planning कर ली है, तो पर्सनल लोन फायदेमंद हो सकता है। लेकिन जरूरत न होने पर सिर्फ shopping, पार्टियों या फ़िज़ूल खर्चों के लिए लेना financial stress पैदा कर सकता है।
हमेशा वही EMI चुनें जिसे आप आसानी से चुका सकें।
निष्कर्ष
पर्सनल लोन एक सुविधाजनक और तेज़ वित्तीय समाधान है, लेकिन सही planning और ईमानदार repayment अत्यंत ज़रूरी है। यह समझना आवश्यक है कि यह "आसान पैसा" नहीं है, बल्कि एक "जिम्मेदारी" है जिसे समय पर चुकाना होता है।