One Nation One Election क्या है?
One Nation One Election (ONOE) का मतलब है कि:
● लोकसभा चुनाव
● सभी राज्य विधानसभा चुनाव
एक ही समय पर पूरे देश में एक साथ करवाए जाएँ।
इसका लक्ष्य है कि चुनावों को समयबद्ध, सस्ता और कम व्यवधान वाला बनाया जाए।
यह विचार क्यों आया?
भारत में लगभग हर साल कहीं न कहीं चुनाव होते रहते हैं। इससे:
◆ सरकारी मशीनरी का बहुत उपयोग होता है
◆ करोड़ों रुपये खर्च होते हैं
◆ आचार संहिता लगने से सरकारी कामकाज रुक जाता है
इसीलिए एक साथ चुनाव कराने का विचार पेश किया गया।
One Nation One Election के फायदे
1) सरकारी खर्च में बड़ी बचत
➤ बार-बार चुनाव कराने में सरकार, राजनीतिक दल और प्रशासन पर भारी खर्च आता है।
➤ एक साथ चुनाव होने से Election Commission सिर्फ एक बार तैयारी करेगा।
➤ अनुमान है कि कुल चुनाव खर्च में 30–40% तक कमी आ सकती है।
2) आचार संहिता बार-बार नहीं लगेगी
➤ अभी हर चुनाव में आचार संहिता लगती है, जिससे योजनाएँ रुक जाती हैं।
➤ एक साथ चुनाव होने से यह बाधा सिर्फ एक बार आएगी।
3) सरकारी कामकाज तेज़ी से चलेगा
● विकास कार्यों पर अधिक फोकस रहेगा
● मंत्री और अधिकारी चुनावी व्यस्तता से बाहर रहेंगे
● प्रशासनिक रुकावट कम होगी
4) सुरक्षा बलों का उपयोग कम होगा
➤ हर बार चुनाव में भारी संख्या में पुलिस व केंद्रीय बलों की आवश्यकता पड़ती है।
➤ एक साथ चुनाव से यह दबाव कम होगा।
5) राजनीतिक स्थिरता बढ़ सकती है
◆ बार-बार होने वाले चुनावों की राजनीति कम होगी
◆ लम्बे समय तक सरकार बिना रुकावट काम कर सकेगी
One Nation One Election के नुकसान / चुनौतियाँ
1) राज्यों की स्वतंत्रता पर असर
● राज्यों की अपनी राजनीतिक स्थिति होती है।
● यदि कोई राज्य सरकार गिर जाती है तो?
● क्या पूरे देश को इंतज़ार कराना सही होगा?
2) लॉजिस्टिक चुनौती बहुत बड़ी
➤ पूरे देश में एक ही समय पर चुनाव कराना बेहद कठिन है।
➤ लाखों EVM, लाखों पोलिंग बूथ, सुरक्षा बल — इन सबकी एक साथ जरूरत पड़ेगी।
3) जनादेश का असर बदल सकता है
◆ जब लोकसभा और विधानसभा साथ होते हैं, तो लोग एक ही पार्टी को वोट देने की तरफ झुक सकते हैं।
◆ इससे क्षेत्रीय पार्टियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
4) संविधान में बड़े बदलाव की जरूरत
➤ एकसाथ चुनाव संभव बनाने के लिए कई संवैधानिक संशोधनों की जरूरत पड़ेगी।
➤ यह संसद और राज्यों दोनों के लिए कठिन प्रक्रिया है।
भारत में पहले भी हुए थे एक साथ चुनाव
1952, 1957, 1962 और 1967 में भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हुए थे।
1968–69 के बाद कई राज्य सरकारें समय से पहले गिर गईं, जिससे चुनाव चक्र टूट गया।
क्या One Nation One Election लागू होगा?
2024–25 में सरकार ने इसके लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है।
समिति ने सुझाव दिया है कि:
● देश में चरणबद्ध तरीके से चुनाव चक्र को एकसाथ लाया जा सकता है
● संवैधानिक, प्रशासनिक और वित्तीय तैयारी की जरूरत होगी
● चुनाव आयोग और राज्यों की सहमति जरूरी है
निष्कर्ष (Conclusion)
One Nation One Election एक बड़ा और महत्वाकांक्षी विचार है।
इससे देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और प्रशासन में बड़ा बदलाव आ सकता है।
◆ फायदे — खर्च में कमी, स्थिरता, कम व्यवधान
◆ नुकसान — राज्यों की स्वतंत्रता पर असर, बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती
अंत में, यह राजनीतिक सहमति और संवैधानिक बदलावों पर निर्भर करेगा कि यह मॉडल भारत में लागू हो पाता है या नहीं।