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पर्यावरण, जलवायु तथा टिकाऊ विकास और उनकी राजनीति में भूमिका — जैसे Climate Policy, Sustainable Development आदि

आज दुनिया जिस तेज़ी से बदल रही है, उसमें पर्यावरण (Environment), जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और टिकाऊ विकास (Sustainable Development) सबसे बड़ी वैश्विक चुनौतियों के रूप में उभर चुके हैं। ये सिर्फ वैज्ञानिक बहसों का विषय नहीं हैं, बल्कि राजनीति,

November 12, 2025 · 👁 237 views
पर्यावरण, जलवायु तथा टिकाऊ विकास और उनकी राजनीति में भूमिका — जैसे Climate Policy, Sustainable Development आदि

◆ 1. पर्यावरण और जलवायु मुद्दे राजनीति में क्यों महत्वपूर्ण हो गए?

राजनीतिक रूप से पर्यावरण आज इसलिए मुख्य चर्चा में है क्योंकि—

  • बारिश और मौसम सीधे किसानों पर असर डालते हैं
    • प्रदूषण शहरों में स्वास्थ्य संकट बन चुका है
    • ऊर्जा की जरूरतें बढ़ रही हैं
    • युवा अब sustainable future की मांग कर रहे हैं
    • ग्लोबल दबाव और अंतरराष्ट्रीय समझौते

भारत को अब ऐसी नीतियों की जरूरत है जो विकास और पर्यावरण दोनों का संतुलन बनाए रख सकें।

◆ 2. जलवायु परिवर्तन (Climate Change) — भारत पर इसका प्रभाव कितना गंभीर है?

भारत दुनिया में जलवायु परिवर्तन से सबसे प्रभावित देशों में से एक है।

➤ भारत पर जलवायु परिवर्तन के प्रमुख प्रभाव

♦ मानसून की अनिश्चितता
♦ अत्यधिक गर्मी (Heatwaves)
♦ ग्लेशियर पिघलना
♦ बाढ़ और सूखा
♦ समुद्र-स्तर में बढ़ोतरी
♦ कृषि उत्पादकता घटाना

ये समस्याएँ न सिर्फ पर्यावरणीय हैं, बल्कि राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दे भी बन चुकी हैं।

◆ 3. टिकाऊ विकास (Sustainable Development) — सिर्फ पर्यावरण नहीं, विकास का नया मॉडल

टिकाऊ विकास का मतलब है—
• आर्थिक विकास
• पर्यावरण संरक्षण
• सामाजिक समानता
—इन तीनों का संतुलन।

भारत में टिकाऊ विकास इसलिए जरूरी है क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, लेकिन संसाधन सीमित हैं।

➤ टिकाऊ विकास के प्रमुख लक्ष्य (SDGs)

  • गरीबी कम करना
    • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
    • स्वच्छ ऊर्जा
    • जल संरक्षण
    • जलवायु कार्रवाई
    • टिकाऊ शहर
    • समानता और न्याय

ये लक्ष्य सरकार की योजनाओं और बजट का अहम हिस्सा हैं।

◆ 4. पर्यावरण और जलवायु की राजनीति (Environment & Climate Politics) — क्यों बढ़ रही है?

अब राजनीति सिर्फ सड़कों और बिजली से नहीं चलती। युवा और शहरी मतदाता पर्यावरण को बड़ा मुद्दा मान रहे हैं।

➤ राजनीति में पर्यावरण मुद्दे क्यों बढ़ रहे हैं?

♦ बढ़ता प्रदूषण
♦ बढ़ती हीटवेव
♦ वायु गुणवत्ता पर मीडिया का फोकस
♦ ग्लोबल वार्मिंग एक वास्तविक खतरा
♦ नागरिक अधिक जागरूक

अब चुनावी घोषणापत्र में भी पर्यावरण नीतियों को जगह मिल रही है।

◆ 5. भारत की प्रमुख पर्यावरण और जलवायु नीतियाँ (Climate Policies of India)

भारत ने कई नीतियाँ लागू कीं जो भविष्य बदल सकती हैं।

➤ 1. National Action Plan on Climate Change (NAPCC)

  • सोलर मिशन
    • ऊर्जा बचत मिशन
    • ग्रीन इंडिया मिशन

➤ 2. Electric Vehicle Policy

♦ 2030 तक EV उपयोग बढ़ाना
♦ चार्जिंग स्टेशन बढ़ाना

➤ 3. Clean India Initiative (Swachh Bharat)

  • स्वच्छता अभियान
    • कचरा प्रबंधन सुधार

➤ 4. National Clean Air Programme (NCAP)

  • 122 शहरों में प्रदूषण कमी लक्ष्य

➤ 5. Renewable Energy Policy

♦ 450 GW स्वच्छ ऊर्जा का लक्ष्य
♦ सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा

इन नीतियों का उद्देश्य पर्यावरण को बचाते हुए आर्थिक विकास जारी रखना है।

◆ 6. टिकाऊ विकास में सरकार की क्या भूमिका है?

सरकार को सिर्फ कानून नहीं बनाना, बल्कि—

  • जागरूकता फैलाना
    • उद्योगों पर नियंत्रण
    • हरित ऊर्जा को बढ़ावा
    • वृक्षारोपण
    • जल संरक्षण
    —जैसे कदम भी उठाने होते हैं।

➤ टिकाऊ विकास और सरकारी योजनाएँ

♦ जल जीवन मिशन
♦ नमामि गंगे
♦ उजाला LED कार्यक्रम
♦ स्मार्ट सिटी मिशन
♦ हरित भारत अभियान

ये योजनाएँ सीधे नागरिकों के जीवन को सुधारने और जलवायु संरक्षण दोनों का समाधान करती हैं।

◆ 7. प्रदूषण — भारत की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौती

भारत के कई शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में गिने जाते हैं।

➤ प्रदूषण के राजनीतिक समाधान

  • Construction regulation
    • Low-emission vehicles
    • औद्योगिक नियम
    • Air quality monitoring

राजनीति का दबाव सरकार को सख्त नीतियाँ लागू करने के लिए मजबूर करता है।

◆ 8. पर्यावरण का चुनावों पर प्रभाव — नया ट्रेंड

अब युवा मतदाता और शहरी आबादी पर्यावरण को प्राथमिक मुद्दा मानती है।

➤ क्यों?

♦ स्वास्थ्य
♦ रोजमर्रा की सुविधा
♦ शिक्षा में बढ़ती environmental awareness
♦ सोशल मीडिया का प्रभाव

कई राज्यों ने चुनावों में “Green Manifesto” पेश किया है।

◆ 9. उद्योग और अर्थव्यवस्था पर पर्यावरण नीति का प्रभाव

पर्यावरण नियमों से उद्योग प्रभावित होते हैं, लेकिन लंबे समय में:

  • ऊर्जा खर्च घटता है
    • निर्यात बढ़ता है (ग्रीन स्टैंडर्ड्स से)
    • कामगारों की सुरक्षा बढ़ती है
    • पर्यावरण-अनुकूल उद्योगों में रोजगार बढ़ते हैं

ग्रीन इकॉनमी आने वाले वर्षों में करोड़ों रोजगार दे सकती है।

◆ 10. भविष्य — भारत को किन पर्यावरण नीतियों की जरूरत है?

भारत को अब अगले 20–30 सालों के लिए नई नीति रूपरेखा बनानी होगी:

➤ जल प्रबंधन की राष्ट्रीय नीति
➤ भारी उद्योगों के लिए ग्रीन रेटिंग
➤ EV infrastructure का विस्तार
➤ स्मार्ट ग्रामीण विकास
➤ ग्रीन बिल्डिंग अनिवार्यता
➤ राष्ट्रीय स्तर पर climate education

ये नीतियाँ भारत को जलवायु संकट से बचाने के लिए जरूरी हैं।

◆ निष्कर्ष — पर्यावरण और जलवायु अब राजनीति के केंद्र में हैं

आज की राजनीति में पर्यावरण सिर्फ एक मुद्दा नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा है।
विकास सिर्फ इमारतों और GDP से नहीं मापा जा सकता, बल्कि—

  • स्वच्छ हवा
    • स्वच्छ पानी
    • सुरक्षित जलवायु
    • टिकाऊ संसाधन

—इनसे भी तय होगा।

भारत का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि हम climate policy + development का संतुलन कितना अच्छी तरह बना पाते हैं।

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