मां स्कंदमाता का स्वरूप
मां स्कंदमाता कमल के फूल पर विराजमान होती हैं और उनकी गोद में भगवान स्कंद (कार्तिकेय) बैठे होते हैं।
उनके चार हाथ होते हैं और उनका स्वरूप अत्यंत शांत और दिव्य होता है।
पूजा विधि (Step-by-Step)
सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान को शुद्ध करें।
पूजा के मुख्य स्टेप:
- दीपक जलाएं
- गंगाजल छिड़कें
- मां को कमल का फूल अर्पित करें
- रोली, अक्षत चढ़ाएं
- केले का भोग लगाएं
इसके बाद मां की आरती करें और मंत्र जाप करें।
मंत्र
ॐ देवी स्कंदमातायै नमः
कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार मां पार्वती ने भगवान शिव से विवाह के बाद कार्तिकेय को जन्म दिया।
जब देवताओं को असुरों से बचाने की जरूरत पड़ी, तब कार्तिकेय ने युद्ध किया और विजय प्राप्त की। इसलिए मां स्कंदमाता को शक्ति और मातृत्व का प्रतीक माना जाता है।
भोग
मां स्कंदमाता को केला अत्यंत प्रिय है। इस दिन केले का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
खास उपाय
1. बच्चों को भोजन कराएं
इस दिन बच्चों को भोजन कराने से मां प्रसन्न होती हैं।
2. केले का दान करें
केले का दान करने से सुख-समृद्धि आती है।
3. दीपक जलाएं
घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
क्या करें
- सात्विक भोजन करें
- पूजा नियमित करें
- सकारात्मक सोच रखें
क्या न करें
- क्रोध न करें
- तामसिक भोजन न करें
- किसी का अपमान न करें
महत्व
मां स्कंदमाता की पूजा से:
- संतान सुख मिलता है
- घर में सुख-शांति आती है
- आर्थिक स्थिति मजबूत होती है
निष्कर्ष
नवरात्रि का पांचवां दिन मां स्कंदमाता की पूजा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है।







